Sunday, 26 August 2012

My Real Friend

best friend थे हम दोनों 
हर बात share करते थे
Gap था हम में साठ बरस का 
पर हमउमर दिखते थे
unlucky जब बोल रहे थे 
सब घर बाहर हमको
बोले इसको कुछ मत कहना 
मार देंगे तुम सबको
बहु का सदा मान करो सब
बहु है घर की शान
बेटी होती घर की रौनक
उनसे जाना जान
मान बहुत दिया दोस्त ने
प्यार बहुत वो करते थे
इतना सब कहाँ पाती बहुए
जितना मान वो देते थे
धूप में न जाने देते मुझको
रखते खूब ध्यान
कहते नाज़ुक बहुत हो बेटी
पढ़ जाओगी बीमार
सुख में दुःख में साथ हमेशा
बहुत अच्छे वो लगते थे
मुझे मानते कमजोरी अपनी
हरदम कहते रहते थे
ICU में जाकर भी किया नही आराम
माला जपी रात भर ,रटा मेरा ही नाम
लड़ते थे वो जब वो मुझसे
चलाते राम बाण
खाना आज नही खाऊंगा
सुना देते फरमान
जब मैं भी न खाती तब
निकल जाती उनकी जान
कहते ले आ खाना माँ मेरी
मैं तुझपे कुरबान
मुझसे पूछे बिना कभी भी
करते न कोई काम
बेटे पर भी trust ना इतना
जितना मुझपे मान
छोड़कर चल दिए कहाँ अब
साथ हमेशा देते थे
Daddy थे कहने को पर
दोस्त का रिश्ता रखते थे ....

4 comments:

  1. Replies
    1. tysm Bubloo ji ...this post is dedicated to my father-in-law whom i luv so much :))

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  2. I read it on Sabd Samvedan Yesterday
    bhavna ko shabdaon me pirone ka ek sarthak prayas

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