मेरी बच्ची मेरी बेटी जब भी मुझसे पुछा करती
यह बतलाओ मुझको मम्मी तुमको मैं कैसी हूँ दिखती
क्या मैं तुमको अच्छी लगती , क्या मैं तुमको प्यारी लगती?
जितना प्यार मैं तुमको करती, क्या तुम भी उतना ही करती?
हसकर मैं उसको तब कहती ,तू मुझको गुड़िया है लगती
तू तो सबको अच्छी लगती ,तू तो सबको प्यारी लगती
कैसे तुझे बताऊं बेटी ..कितना प्यार तुझे मैं करती
बस मैं इतना ही कह सकती,तू जान से ज्यादा प्यारी लगती
गुस्सा करती जब तू ज्यादा,मुझको जंगली बिल्ली लगती
शरारत सूझे जब जब तुझको ,मुझे यह आदत अच्छी लगती
जब खिलखिला कर तू हँसती , मुझे शोख गुलाब है दिखती
कभी न भूल पाऊ वो पल,जब मेरी गोद में थी आई
प्यारी आँखें सुन्दर चेहरा ,एकदम रूई का गोला थी दिखती
रोटी जब भी गुडिया मेरी,तेरे संग मैं रोने लगती
काश मिले तुझे जो भी चाहे,यही मेरी तमन्ना रहती
जैसी प्यारी गुड़िया है तू,हर घर ऐसी बेटी होती ......डिम्पल
यह बतलाओ मुझको मम्मी तुमको मैं कैसी हूँ दिखती
क्या मैं तुमको अच्छी लगती , क्या मैं तुमको प्यारी लगती?
जितना प्यार मैं तुमको करती, क्या तुम भी उतना ही करती?
हसकर मैं उसको तब कहती ,तू मुझको गुड़िया है लगती
तू तो सबको अच्छी लगती ,तू तो सबको प्यारी लगती
कैसे तुझे बताऊं बेटी ..कितना प्यार तुझे मैं करती
बस मैं इतना ही कह सकती,तू जान से ज्यादा प्यारी लगती
गुस्सा करती जब तू ज्यादा,मुझको जंगली बिल्ली लगती
शरारत सूझे जब जब तुझको ,मुझे यह आदत अच्छी लगती
जब खिलखिला कर तू हँसती , मुझे शोख गुलाब है दिखती
कभी न भूल पाऊ वो पल,जब मेरी गोद में थी आई
प्यारी आँखें सुन्दर चेहरा ,एकदम रूई का गोला थी दिखती
रोटी जब भी गुडिया मेरी,तेरे संग मैं रोने लगती
काश मिले तुझे जो भी चाहे,यही मेरी तमन्ना रहती
जैसी प्यारी गुड़िया है तू,हर घर ऐसी बेटी होती ......डिम्पल