Thursday, 30 August 2012

मेरी गुड़िया

 मेरी बच्ची मेरी बेटी जब भी मुझसे पुछा करती
यह बतलाओ मुझको मम्मी तुमको मैं कैसी हूँ दिखती
क्या मैं तुमको अच्छी लगती , क्या मैं तुमको प्यारी लगती?
जितना प्यार मैं तुमको करती, क्या तुम भी उतना ही करती?
हसकर मैं उसको तब कहती ,तू मुझको गुड़िया  है लगती
तू तो सबको अच्छी लगती ,तू तो सबको प्यारी लगती
कैसे तुझे बताऊं बेटी ..कितना प्यार तुझे मैं करती
बस मैं इतना ही कह सकती,तू जान से ज्यादा प्यारी लगती
गुस्सा करती जब तू ज्यादा,मुझको जंगली बिल्ली लगती
शरारत सूझे जब जब तुझको ,मुझे यह आदत अच्छी लगती
जब खिलखिला कर तू हँसती , मुझे शोख गुलाब है दिखती
कभी न भूल पाऊ  वो पल,जब मेरी गोद  में थी आई
प्यारी आँखें सुन्दर चेहरा ,एकदम रूई का गोला थी दिखती
रोटी जब भी गुडिया मेरी,तेरे संग मैं रोने लगती
काश मिले तुझे जो भी चाहे,यही मेरी तमन्ना रहती
जैसी प्यारी गुड़िया  है तू,हर घर ऐसी बेटी होती ......डिम्पल


Monday, 27 August 2012

व्रत बनाम सज़ा

आज भी याद है ,मुझे वो मौन व्रत अपना
जो व्रत कम पर सज़ा ,ज्यादा था मेरे लिए
यूँ तो हरदम लड़ते थे हम दोनों
पर उस दिन हँसी में कही तुम्हारी बात 

लगी थी नश्तर बन कर .........
और फांस की तरह चुभा था गले में कुछ मेरे 
बस सोच लिया तभी के नही करुँगी तुमसे बात 
पर कब तक यह नही तय  कर पाई थी 
तुमने भी तो  नही पूछा  था 
कुछ मुझसे कि  कब तक 
रह पाओगी मुझे बिन बुलाये।......
एक दो करके बीत गए सात  दिन 
पर टस  से मस न हुई थी मैं,
अब तो झलक रही थी उदासी 
तुम्हारी आँखों में भी .....
जा रहे थे तुम 15 दिन के लिए 

और खुश थे कि  अब तो ज़रूर बुलाएगी 
पर तुम्हारे जाने से पहले ही 
अगली सुबह चली गयी थी मंदिर 
पत्थर रख के दिल पे अपने .......
जब भेजा था वहां से कार्ड मुझे 
Miss You So Much....का 
तो आँख भर आई थी मेरी 
कोसा था खुद को मैंने ......
आ रहे थे उस शाम तुम वापिस 

ठीक समय पर पहुँच गयी थी 
दरवाजे पे तुम्हे देखने को 
पर देख कर भी कुछ बोली न जब 
तो तुम बोल उठे थे ....
नाराज़ हो अब तक ??????

फूट फूट कर रो पड़ी थी मैं 
गले से लगकर तुम्हारे।.....
चुप अच्छी नही लगती तू 
बात किया कर मुझसे 
नहीं तो मर जाएगी।......
बस इतना ही बोले थे तुम 
और उसी पल सोच लिया 
था मैंने कि  इतना कठिन 
व्रत न करुँगी कभी भी 
जो मेरे साथ साथ सज़ा 
दे किसी और को भी ....................

Sunday, 26 August 2012

My Real Friend

best friend थे हम दोनों 
हर बात share करते थे
Gap था हम में साठ बरस का 
पर हमउमर दिखते थे
unlucky जब बोल रहे थे 
सब घर बाहर हमको
बोले इसको कुछ मत कहना 
मार देंगे तुम सबको
बहु का सदा मान करो सब
बहु है घर की शान
बेटी होती घर की रौनक
उनसे जाना जान
मान बहुत दिया दोस्त ने
प्यार बहुत वो करते थे
इतना सब कहाँ पाती बहुए
जितना मान वो देते थे
धूप में न जाने देते मुझको
रखते खूब ध्यान
कहते नाज़ुक बहुत हो बेटी
पढ़ जाओगी बीमार
सुख में दुःख में साथ हमेशा
बहुत अच्छे वो लगते थे
मुझे मानते कमजोरी अपनी
हरदम कहते रहते थे
ICU में जाकर भी किया नही आराम
माला जपी रात भर ,रटा मेरा ही नाम
लड़ते थे वो जब वो मुझसे
चलाते राम बाण
खाना आज नही खाऊंगा
सुना देते फरमान
जब मैं भी न खाती तब
निकल जाती उनकी जान
कहते ले आ खाना माँ मेरी
मैं तुझपे कुरबान
मुझसे पूछे बिना कभी भी
करते न कोई काम
बेटे पर भी trust ना इतना
जितना मुझपे मान
छोड़कर चल दिए कहाँ अब
साथ हमेशा देते थे
Daddy थे कहने को पर
दोस्त का रिश्ता रखते थे ....